राजतंत्र से प्रजातन्त्र तक 

राजा जी दरबार में आये, 

संग अपने दो तोते लाये,

सबने सोचा ये कैसी बलाए, 

तभी दोनों तोते बौखलाए।  

पिंजरा गिरा पिंजरा टूटा,

पंछी फुर्र आसमान में,

राजा जी का गुस्सा फूटा 

भेजा सबको करागार में। 

राजा जी फिर चल दिये, तोते पकड़ने

जैसे राजा  पास जाएँ, तोते उड़ गए अकड़के 

राजा इधर-उधर फुदकते, बिल्कुल तोतों जैसे,

उन्हे पुकारते, फटकारते, पर तोते आते कैसे?

सब बोले ये कैसा राजा

तोते खुद के पकड़ न पाये, 

लेकिन जब देखो तब हम पर 

अपना हुक्म चलाए। 

नहीं सुनेंगे इसकी अब, इस राजा को भगाओ 

कहने लगे  सभी कि नए राजा को ले आओ।

सुनकर उछले मुख्य मंत्री, लपके गद्दी धारण करने,

पीछे सेनापति पहुंच गए, गद्दी के लिए लड़ने

बुलाया गया पुरोहितों को, कई मुखिया भी आए,

हाथ जोड़ कर बोला सबने, इनका झगड़ा सुलझाएँ

दोनों झगड़ रहे थे तब तक राजकुमार पधारे,

उनके पीछे नगर सेठ भी दौड़े दौड़े आए।

चारो जुट गए एक साथ,

होने लगी बहस भारी

सबका एक ही प्रश्न था, 

कौन बने उत्तराधिकारी?

देख लड़ाई चारो की प्रजा का मन चकराया

कहने लगे राजा योग्य हमें कोई नज़र न आया

कैसे होगा चयन राजा का, कौन बनेगा भूपति

तभी पुराने राजा की आ गई रानी बुद्धिमती 

रानी देख सभी के मन में राहत आई

प्रजाजनों ने मिलकर उनको अपनी व्यथा सुनाई 

देखिये सेनापति जी को, ये कैसे राज करेंगे,

कुछ भी निर्णय के पहले, ये तो लड़-मरेंगे। 

राजकुमार किशोर हैं,  इनसे क्या हो पाएगा

जनता का तो और भी बुरा हाल हो जाएगा। 

देखिए नगर सेठ जी को अब इनका क्या ही कहना

राज्य से क्या मतलब इनको, बस पैसा चाहिए बहना।

आखिरी मुख्य मंत्री जी हैं, इनको हम न सहेंगे

राज काज में निपट अज्ञानी, बस दुविधा में ही रहेंगे। 

रानी बुद्धिमान थीं, वेद पुराण की ज्ञानी,

सब ने उनकी राय ली, कहा दूर करें परेशानी,

बोली वो विदुषी अब होंगे न राजा रानी

सारे देशवासी लिखेंगे आपनी खुद की कहानी

ऐसे राजाओं से देश न होगा महान,

रास्ता अब एक ही है , करो सब मतदान, –

बराबर सब दरबार में, न कोई भेदभाव,

नागरिकों को खूब भाया, रानी का प्रस्ताव

 

सरकार चुनेंगे अपनी सब 

न बदलने पड़ेंगे राजा तब 

अब सबके हाथ में होगा एक यंत्र

अब हमारे देश में होगा प्रजातन्त्र।